Monday, September 5, 2011

बस भोर का उगता हुआ , सूरज मेरी पहिचान है

बस भोर का उगता हुआ , सूरज मेरी पहिचान है

जीवन में कभी आयी नहीं, रात की यह कालिमा
वह सुबह कीलित हो गई ,जबसे यह जीवन बना
कुछ और जो करती बयां , वह अक्स बे-ईमान है
बस भोर का उगता हुआ , सूरज मेरी पहिचान है

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