मेरी वेचारगी-
कभी-कभी सोचता हूँ क़ि काश ! जीवन दो बार जीने को मिलता ;एक बार सीखने के लिए ,अनुभव लेने के लिए ,ट्रायल करने के लिए व् फिर दूसरी बार पूरी तरह जीने के लिए ;पर यह तो कल्पना लोक की उडान है,यथार्थ जीवन में तो यह संभव नहीं है
-परमात्म प्रकाश भारिल्ल ,अन्तर्द्वन्द्व -अपनी बात
No comments:
Post a Comment