आज जब यह विचार मेरे मन में आता है क़ि कोई जान पाया हो या न जान पाया हो ,पर क्या प्रकृति से मेरा यह विचार छुप सका होगा ? जाने कैसे -कैसे कर्मबंध हुए होंगे मेरे इन मायाचारी परिणामों के फलस्वरूप . क्या मुझे स्वयं ही इन मायाचारी परिणामों का फल नहीं भोगना होगा ?
-परमात्म प्रकाश भारिल्ल-अंतर्द्वंद्व-पेज-20
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