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Thursday, September 22, 2011

भूलों रहित जीवन ये अपना , निर्दोष होना चाहिए


"गल्तियाँ" क्या ,क्यों और कैसे ? (13)

माफ़ यदि हो भी जाए , पर गलतियां अधिकार ना
जो अधिकार माने कोई तो,हो सके ये स्वीकार ना
अफ़सोस का ये बिषय हें , अफ़सोस होना चाहिए
भूलों रहित जीवन ये अपना , निर्दोष होना चाहिए

Wednesday, September 21, 2011

अज्ञान वश हुई भूल के , उपचार का निर्धार हो

"गल्तियाँ" क्या ,क्यों और कैसे ? (12)



उनकी क्षमा की याचिका भी , सहज ही स्वीकार हो

अज्ञान वश हुई भूल के , उपचार का निर्धार हो


जानकर अपराध करता , फिर कहे इसको भूल जा

यह नहीं तेरी सरलता,क्या परिणाम इसका तू बता

मनुज होकर भी अगर तू , भूलों भरा रह जाएगा

"गल्तियाँ" क्या ,क्यों और कैसे ? (11)



यदि भूल हुई तो भूल का , अफ़सोस होना चाहिए

फिर कभी ना भूल करदें,हमको होश होना चाहिए

मनुज होकर भी अगर तू , भूलों भरा रह जाएगा

अवसर न ये फिरसे मिलेगा,कब सुधर तू पायेगा

गल्तियाँ चाहे जानकार हों,या अपराध हो अज्ञान से


"गल्तियाँ" क्या ,क्यों और कैसे ? (10)


गल्तियाँ चाहे जानकार हों,या अपराध हो अज्ञान से

दोनों ही होते हानिकारक , यह समझकर वा जानके

यत्न करना चाहिए कि ,किसी को हानि न हो भूलसे

हित,मित,प्रिय हों वचन मेरे , न वचन बोलो शूल से

दुरूपयोग है अज्ञान का जो , अपराध का औजार हो

"गल्तियाँ" क्या ,क्यों और कैसे ? (9)

भूल से यदि भूल हो तो , उसके प्रति अफ़सोस हो

गल्तियाँ स्वीकार करने , में ना कभी संकोच हो
अब फिर न होगी ये कभी , ये ह्रदय में निर्धार हो
दुरूपयोग है अज्ञान का जो , अपराध का औजार हो

हम सब मनुज हें आधे , अधूरे , भूल होना सहज है

"गल्तियाँ" क्या ,क्यों और कैसे ? (8)


हम सब मनुज हें आधे , अधूरे , भूल होना सहज है

भूलों भरा व्यवहार यूं तो , अज्ञान की ही उपज है

कर जानकर जो गल्तियाँ,उनको भूल ही ठहराएगा

अपराध के इस दंड से , वह बच तो नहीं ही पायेगा

हो जानकर या भूल से , वह नुकसान तो पहुंचाएगी

"गल्तियाँ" क्या ,क्यों और कैसे ? (7)


हो जानकर या भूल से , वह नुकसान तो पहुंचाएगी

यदि भूल से भी आग छूले , किसको नहीं जलायेगी

शर्मिंदगी यदि अपराध करना , भूल भी तो है वही

परिणाम पर जो नजर डालें , तो फर्क दोनों में नहीं

है बड़ा ही फर्क ,समझो , भूल और अपराध में

"गल्तियाँ" क्या ,क्यों और कैसे ? (6)


है बड़ा ही फर्क ,समझो , भूल और अपराध में

है एक सच यह भी अरे कि, भूल भी अपराध है

अज्ञान वश की गल्तियाँ , भूल कहलाती अरे

जानकर की गल्तियाँ ,बो अपराध संज्ञा को धरे

कर गलतियाँ , उनको छुपाना ,सबसे बडा यह पाप है

भूलों का अंक गणित -
(५)
है कौन बो मानव जगत में , भूल जिससे ना हुई
वह व्यक्ति भी दुर्लभ ही है, भूल जिसकी चल गयी
कर गलतियाँ , उनको छुपाना ,सबसे बडा यह पाप है
गलतियों के संग जीना , यह मनुज को अभिशाप है

ना कर सके कुछ जिन्दगी में , जो गल्तियों से डर गए

"गल्तियाँ" क्या ,क्यों और कैसे ? (3)

ना कर सके कुछ जिन्दगी में , जो गल्तियों से डर गए
असफल रहे जो गल्तियाँ कर,उस बात पर ही अड़ गए
बे लोग ही हें सफल जो , कर गल्तियाँ फिर संभल गए
भूल अपनी सुधारकर , जो तुरत आगे बड गए

सच्चाइयों के ज्ञान पर भी , गल्तियाँ हो जायेंगी

"गल्तियाँ" क्या ,क्यों और कैसे ? (4)
सच्चाइयों के ज्ञान पर भी , गल्तियाँ हो जायेंगी
सुधर जायेंगी तुरत बो , बे दूर तक ना जायेंगी
गल्तियाँ करना नहीं , ना मानना अपराध है
गल्तियाँ करना है कमी , ना मानना यह पाप है

स्वीकारता जो गल्तियाँ , उसके ह्रदय में सरलता

"गल्तियाँ" क्या ,क्यों और कैसे ? (2)

स्वीकारता जो गल्तियाँ , उसके ह्रदय में सरलता
वह तो सफल हो जाएगा,उससे दूर भागे बिफलता
भूलका पहिचानना,स्वीकारना,सबसे बड़ा उपचार है
इतना भी जो ना कर सके ,उसकी जिन्दगी बेकार है