Sunday, September 18, 2011

तुम्हारी आँख है ऐसी ,चुभ जाये नैनों का शर

तुम्हारी बात है ऐसी ,भर जाये नैनों का सर/
तुम्हारी आँख है ऐसी ,चुभ जाये नैनों का शर/

-परमात्म प्रकाश भारिल्ल -जून -१९७९

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