Thursday, October 27, 2011

न ग़मों का कोई भी साथी , अकेले हें ये एकाकी ,, इसी से साथ देने को , कभी इनसे निभा लेते हें हम


दुनिया में सबसे कमजोर यदि कोई है , सबसे तन्हा (अकेला ) यदि कोई है तो वे हें दुःख , उनका कोई संगी ,साथी और शुभचिंतक नहीं है, और तो और सभी उन्हें नष्ट करने के लिए पीछे  पड़े रहते हें , ऐसे में उनकी रक्षा सबसे मुश्किल काम है .
सुखों का क्या , सभी को इनकी चाहत है , सब इन्हें बुलाते हें और सहेजते हें , इनका कौन बाल बांका कर सकता है अत: इनकी परवाह करने की क्या जरूरत है , ये तो स्वयं रक्षित हें .

न जरूरत होश खोने की , ये यूं ही भुला लेते हें हम 
खुशी के दौर में इनको , तन्हा  ही  सुला देते हें हम 
न ग़मों का कोई भी साथी ,  अकेले  हें  ये  एकाकी  
इसी से साथ देने को , कभी इनसे निभा लेते हें हम 

खुशियों की सजे महफ़िल , सदा सबसे घिरी रहतीं 
इन्हें क्या चाहिए शरना , सभी  को  चाह है इनकी 
ये कैसे नष्ट हो पायें , सो नहीं परवाह मुझे इनकी 
ये  आयें  या  जाएँ  ,  इन  बिन  चला  लेते हें हम  

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