दुनिया में सबसे कमजोर यदि कोई है , सबसे तन्हा (अकेला ) यदि कोई है तो वे हें दुःख , उनका कोई संगी ,साथी और शुभचिंतक नहीं है, और तो और सभी उन्हें नष्ट करने के लिए पीछे पड़े रहते हें , ऐसे में उनकी रक्षा सबसे मुश्किल काम है .
सुखों का क्या , सभी को इनकी चाहत है , सब इन्हें बुलाते हें और सहेजते हें , इनका कौन बाल बांका कर सकता है अत: इनकी परवाह करने की क्या जरूरत है , ये तो स्वयं रक्षित हें .
खुशी के दौर में इनको , तन्हा ही सुला देते हें हम
न ग़मों का कोई भी साथी , अकेले हें ये एकाकी
इसी से साथ देने को , कभी इनसे निभा लेते हें हम
खुशियों की सजे महफ़िल , सदा सबसे घिरी रहतीं
इन्हें क्या चाहिए शरना , सभी को चाह है इनकी
ये कैसे नष्ट हो पायें , सो नहीं परवाह मुझे इनकी
ये आयें या जाएँ , इन बिन चला लेते हें हम
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