Friday, September 16, 2011

Parmatm Prakash Bharill: कर ना सकूं अपने लिए , तेरे लिए कुछ कर सकूं

Parmatm Prakash Bharill: कर ना सकूं अपने लिए , तेरे लिए कुछ कर सकूं: हें कौनसी बो सीडियां , नजरों में तेरी चढ़ सकूं कब से यूं ठहरा हुआ हूँ , कुछ तो आगे बढ़ सकूं आदमी जो बन न पाऊं , इंसान से मैं जुड़ सकू कर ना ...

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