Monday, September 5, 2011

क्या कोई हमें हमारे स्वयंकृत कर्मों का फल भोगने से बचा सकता है -

क्या कोई हमें हमारे स्वयंकृत कर्मों का फल भोगने से बचा सकता है -

जब ऐसे किसी भगवान की कल्पना हमारे चित्त में आती है ,जो हमें हमारे स्वयंकृत कर्मों का फल भोगने से बचा सके ,तब ऐसा कोई सर्वशक्तिमान परमात्मा तो हमें दिखाई देता नहीं ,वह तो हमारी तथाकथित आस्था के सिंहासन पर ही विराजमान रहता है , पर इस तरह के कार्य संपन्न कर देने एक दाबा करने बाले कुछ तथाकथित छोटे-छोटे परमात्मा हमें अपने इर्द-गिर्द ही मिल जाते हें और तब "मरता क्या न करता "इस नीति के अनुसार हम सहज ही उनकी गिरफ्त में आजाते हें .

-परमात्म प्रकाश भारिल्ल -"क्या म्रत्यु अभिशाप है " -पेज-10

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