यदि हम किसी और के द्वारा निर्मित किसी भी कृति को पसंद नहीं करते तो फिर भला फिर हम अपने आपको गढ़े जाने के लिए किसके हवाले करदें ? इसलिए यदि हम अपने जीवन को अपनी स्वयं की परिकल्पना के अनुरूप एक आदर्श शिल्प बनाना चाहते हें तो हमें अपना शिल्पी स्वयं बनना होगा .
-परमात्म प्रकाश भारिल्ल -अंतर्द्वंद्व ,अपनी बात
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